अजीब विचार.....

           

आज के ज़माने में आप जो सोच सकते हैं वो कर भी सकतें हैं | मैंने जब पहली बार भूगोल में बारिश की संकल्पना (कांसेप्ट) पढी थी की पहाड़ो से टकराकर भी बारिश होती है तब मैंने सोचा था की हमें भी राजस्थान में पहाड़ बना देना चाहिए |
            राजस्थान में बारिश की कमी है जबकि वहाँ अरावली पर्वत की लम्बी श्रंखला है | ऐसा इसलिए है क्यूंकि ये पर्वत श्रंखला दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के सामानांतर आती है अर्थात मानसून उनसे टकराता नही बल्कि उसके साथ-साथ होकर गुजर जाता है | खैर मैं यहाँ आपसे सच में पहाड़ बनाने की बात नही कह रही हूँ क्यूंकि वो खर्चीला तो हे ही साथ में हमें यह भी देखना होगा की अगर मानसून की बारिश यहाँ हो गई तो आगे के हिस्सों में समस्या न आ जाये | 
            उस समय मैंने सोचा था की यह विचार अच्छा तो है किन्तु व्यावहारिक नही है |
अभी-अभी मेने अख़बार मैं पढ़ा की सउदी अरब बारिश की संभावना बढाने हेतु पहाड़ बनाने की योजना पर काम कर रहा है | दरअसल सउदी अरब में बारिश बेहद कम होती है जिसके लिए वह कई बार कृत्रिम बारिश की सहायता भी ले चुका है और अब वह इस परियोजना के लिए पहाड़ की ऊंचाई, ढाल आदि की गणना में लगा है |

            तो अगली बार जब आपके मन मैं भी ऐसा अजीब विचार आये तो इंतजार कीजिये वह कभी न कभी हकीकत जरुर बनेगा लेकिन तब जब कोई अन्य महान व्यक्ति भी इस बारे मैं सोचेगा या चाहें तो आप भी इस विचार को आगे बढ़ाकर महान बन सकतें हैं |

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