आखिर क्यों बचाऊँ मैं पानी ???


देश में पानी की कमी आजकल सुर्ख़ियों का विषय बनी हुआ है | लेकिन हम में से कितने लोग इस विषय को गंभीरता से लेकर स्वयं जल संरक्षण के बारे में सोचते है |
            आपके सब के बारें में सटीकता से नही कह सकती इसलिए मेरी ही बात करती हूँ अख़बारों में पानी के लिए जान जोखिम में डालते लोगों (विशेषकर महिलाओं व बच्चों ) की तस्वीरें देखकर मुझे दुःख होता है | लेकिन सिर्फ चंद ही मिनिटों में यह न जाने कहाँ गायब भी हो जाता है | जब इस बारें में मैंने सोचा तो, एक विचार आया की यदि पानी हम न सहेजें तो अर्थात घरों में इस्तेमाल के बाद निकलने वाला पानी, बारिश का पानी आदि जाकर कहीं न कहीं जमीन में या नालियों के माध्यम से निश्चित जगह ही तो जाता होगा | तो फिर समस्या क्या है पानी बर्बाद करने में ? क्यूंकि पानी जमीन में जाने से भूजल स्तर बढेगा और नालियों में जाने वाले पानी का ट्रीटमेंट कर उसे पुनः उपयोग में लाया जा सकता है |
            काफी दिनों तक मेरी विचारधारा यही बनी रही लेकिन फिर जब  मैंने कहीं पर  एक लेख पढ़ा तब जाकर बात स्पष्ट रूप से समझ आई की मैं कितनी गलत थी |
            दरअसल समस्या यह है की घरों से निकलने वाला पानी नालियों से होता हुआ अपने मुकाम पर पहुचतें-पहुचतें इतना अधिक प्रदूषित हो जाता है की उसके ट्रीटमेंट में समस्या आती है | ट्रीटमेंट की यह समस्या सुलझाई तो जा सकती है लेकिन यह इतनी अधिक खर्चीली साबित होती है की गरीब आदमी वहन नही कर सकता | तरह-तरह के केमिकलों तथा अपशिष्ट पदार्थों के कारण पानी दूषित होने के साथ-साथ गरीबों की पहुँच से दूर होता जा रहा है | फलतः गरीब दूषित पानी पीने को मजबूर हो रहा है |
            और रही बात बारिश के पानी के ज़मीन में उतरने की तो केवल कुछ ही जगह ऐसा होता है क्यूंकि कांक्रीट की सड़कों, इमारतों के पक्के फर्शों, छतों से होता हुआ वह पानी नालियों में ही जाता है |
            तो कोशिश कीजिये पानी का दुरूपयोग रोकने की क्यूंकि पानी हम घर में नही बना सकतें और न ही उसका कोई विकल्प खोज सकतें हैं |
            मुझे पता है आज हम इतने व्यस्त हो चुके है की यदि में आपको पानी बचाने का कोई राकेट साइंस बता भी दूँ तो आप उसकी तारीफ तो करेंगे लेकिन अमल में नही ला पाएंगे  इसलिए मैं इस हेतु रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कुछ उपाए बता रही हूँ जो अपनाने में आसान हैं-
   1.   अपने पौधों में पाईप की बजाये बाल्टी व मग्गे की सहायता से पानी दें | इससे पानी भी बचेगा और पौधों की जड़ो से मिट्टी भी नही निकलेगी |
   2.   अपनी कार या बाईक धोते समय भी पाईप का प्रयोग करने से बचें |
  3.   ब्रश करते समय या हाथ धोते समय वाश-बेसिन का नल खुला न छोड़ें | और यदि आदत से मजबूर है तो आटोमेटिक नल लगाने की भी ज़हमत उठायें जो स्वतः बंद चालू हो जायेगा |
   4.   घर के बर्तन इकठ्ठा करके साथ में धोएं | साथ ही अगर मेरी तरह (थोड़े समय पहले ही शुरू किया था ) अपने बर्तन स्वयं धोतें हैं तो यह आदत छोड़ने में ज्यादा समय नही लगेगा |
   5.   कपडे दो-तीन दिन के अन्तराल में धोएं (वाशिंग मशीन में तो कम कपड़ो के लिए भी उतना ही पानी लगता है) |
   6.   नल या पानी के लीकेज को जल्दी सुधरावालें |
   7.   अगर आपकी पानी की टंकी भर जाने कारण अधिकतर आपके वहां पानी ढुलता है तो उसमे कुछ इस तरह पाईप फिट करें की पानी ओवर फ्लो होने पर वह पाईप के द्वारा कहीं जमा हो सके |
   8.   छत से बारिश में गिरने वाले पानी को पाईप के माध्यम से बगीचे आदि (कच्ची ज़मीन) में छोड़ दें |

               

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