दोस्तों के साथ घूमने जाएँ कैमरे के साथ नही !!!

            

               


पिछले रविवार मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने गई थी, काफी मज़ा आया लेकिन बाद में हमें महसूस हुआ की वास्तव में हमने क्या घूमा ? हमने अपना 90 % से ज्यादा समय तो सिर्फ फोटो खीचने में लगा दिया |  
            दरअसल आज-कल सभी लोगो में ( जिसमे मैं भी शामिल हूँ ) फोटो खिचवाने का भूत सवार हो चुका है, हम हर जगह(लोकेशंस) पर फोटो खिंचाना चाहते हैं | फिर उन्हें सोशल साइट्स पर अपलोड करने तक हम दम नहीं लेते, जैसे कोई प्रतिस्पर्धा चल रही हो |
            हम सुन्दर द्रश्यों को अपनी आँखों से देखने की बजाये कैमरे की आँखों से देखने लगें हैं और उस वक्त भी हमारा ध्यान (फोकस) फोटो खिंचा रहे व्यक्ति पर होता है न की नज़ारों पर | फिर उन खिचीं गई तस्वीरों से ही हम वंहा के द्रश्यों को याद रख पातें हैं |
            अगर यह तरीका अच्छा है तो फिर तो हमें कंही घुमने जाने की जरुरत ही नही है हमारे लिए   एक-दूसरे की तस्वीरों के बैकग्राउंड देखना ही काफी है और रही बात स्वयं की तस्वीरों की तो वो भी कट-पेस्ट(एडिटिंग) सॉफ्टवेयर द्वारा आसानी से किया जा सकता है |  तो ऐसे आपका समय भी बचेगा और पैसे भी | ठीक है , खुश ? नही न, क्यूंकि आँखों देखे नजारों की तुलना की ही नही जा सकती | आप बाहर घुमने निकलें हैं ताकि एक-दूसरे के साथ समय बिता सकें, प्रकृति को देख कर महसूस कर सकें न की सिर्फ मोबाइल और कैमरे में उलझे रहने के लिए | हाँ, अपने ज़हन में यादों को संजोने के साथ एक दो यादगिरी की फोटो वाजिब है लेकिन सिर्फ़ उसी में डूबे रहना सही नही |
            मुझे याद है जब में अपने दोस्तों के साथ अक्षरधाम घुमने गई थी | वह मेरे लिए आज तक की सबसे सुन्दर जगह थी साथ ही, वहां का लाइट एंड साउंड शो तो सच में अद्भुत था ! उसे शब्दों में बयां ही नही किया जा सकता | वह ट्रिप मुझे बेहद अच्छे तरीके से याद है क्यूँ ? क्यूंकि वहां पर फोटो खीचने की इज़ाज़त ही नही थी सो मजबूरन हमने सब कुछ अच्छे से देखा |

            तो कोशिश कीजिये की हम केवल दोस्तों के साथ ही नही (सोशल साइट्स पर) दोस्तों के साथ भी वक्त बिताएं |  

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