ज़िन्दगी के उसूल

हर व्यक्ति के कुछ मूल्य होते हैं कुछ उसूल होते हैं जिनके आधार पर वह जीवन जीता है। ये साधारण सी बात है और अच्छी भी पर क्या होता है जब आप अपने उसूलों के आधार पर दूसरों को आँकना(जज करना) शुरू करते हैं, वो भी लोगो के बाह्य स्वरूप या उनकी कुछ आदतों के आधार पर। ये कहाँ तक सही है ? सही गलत के फैसले के लिए मैं अपने कुछ अनुभव साझा करना चाहूँगी। मै और मेरी दोस्त पढ़ने के लिए एक बड़े शहर में गए और हम छोटे शहर के मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हम वहाँ जिस जगह रहते थे उसमें आठ से दस लड़कियाँ थीं । सभी काफी अलग थीं हमें वहाँ शुरू में काफी अजीब लगता था उन लड़कियों का पहनावा उनके द्वारा फ़ोन पर लड़कों से बात करना और हम तो हतप्रभ रह गए जब उन्होंने हमसे पूछा तुम्हारा bf है ? ये सवाल जैसे हम पर वज्र की तरह गिरा, ऐसा लगा जैसे किसी ने हमारा अपमान कर दिया हो । आखिर वो हमें ऐसा कैसे समझ सकतें हैं ? "ऐसा" क्या मतलब है इस शब्द का क्या सोचते थे हम उन लड़कियों के बारे में, कभी तो ये गाना गाते थे हम अपनी स्थिति पर की "ये कहाँ आ गए हम.." मतलब साफ था अपने पैमाने , अपनी सोच के आधार पर हमने उन लड़कियों को गलत और बुरा समझ लिया था। पर उनके साथ कुछ समय रहने पर हम उन्हें समझने लगे या कहें कि हमे समझ आने लगा अपनी कूपमंडूकता के बारे में। हम बहुत अच्छे मित्र बन गए एक नहीं बल्कि वहाँ रह रही सभी लड़कियों के, और काफी अच्छे। वो सभी काफी अच्छी थी। उन्होंने हमें बहुत कुछ सिखाया, हमारी सोच को विस्तार दिया, एक नया नज़रिया दिया। उन लड़कियों की पसंद, नज़रिया, सोच, रहन-सहन हमसे बहुत अलग था पर अलग होना गलत तो नहीं होता । हम अपने संकीर्ण पैमाने के आधार पर किसी को बिना जाने सही या गलत कैसे समझ सकते हैं। व्यक्ति का आकलन उसके दिल से होना चाहिए। हो सकता है कोई व्यक्ति आपके उसूलों से विपरीत हो पर इस लिहाज़ से आप भी तो उस व्यक्ति के उसूलों से विपरीत हुए न । तो, आप सही और वो गलत ऐसा कैसे हो सकता है ? यदि आप चाहतें हैं दुनिया आपको स्वीकार करे तो आपको भी दुनिया को स्वीकार करना होगा । हमारे उसूल, हमारे पैमाने हमारे अपने हैं उन्हें दूसरों पर मत लादिये क्योंकि ऐसा वो भी कर सकते हैं। आप उन्हें असभ्य समझेंगे तो ये अपेक्षा भी मत कीजियेगा की वो आपको गवार न समझें। हमारे उसूल हमारे नियम हैं और हमारे नियम हमारा चुनाव(चॉइस) है और चुनावों का सम्मान किया जाना चाहिए वो हमारे हों या किसी और के ।

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