‘आर्ट ऑफ़ इग्नोरिंग’


साइंस और टेक्नोलॉजी पढ़ते-पढ़ते एक लॉजिक समझ आया, सोचा आपसे साझा कर लूँ | जोंस हॉपकिंस युनिवर्सिटी के द्वारा किये गए अध्ययन में ‘उपेक्षा की कला’ या ‘आर्ट ऑफ़ इग्नोरिंग’ के सार्थक परिणाम मिले हैं |
      शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक प्रयोग किया | दो समूह के लोगों को कंप्यूटर स्क्रीन पर विभिन्न रंगों में अक्षर दिए गए और कुछ निश्चित अक्षर (बी, एफ) तलाशने को कहा गया | एक समूह को कोई निर्देश नही दिया गया जबकि, दूसरे समूह से कहा गया की उन्हें लाल रंग के अक्षरों की उपेक्षा करनी है |
      जिन व्यक्तियों (समूह) ने विचलित कर देने वाली सूचनाओं की स्पष्ट रूप से उपेक्षा की उनके द्रश्य (विसुअल) खोज प्रदर्शन में काफी सुधर देखा गया | यह कौशल रेडियोलाजिस्ट व् एयरपोर्ट बैगेज स्क्रीनर जैसे पेशेवर खोजकर्ताओं के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा |
      खैर, मैं अब मुख्य बात पर आती हूँ | मैं इस रिसर्च के आधार पर कहना चाह रही हूँ की हमें भी ज़िन्दगी में ये लॉजिक यूज़ करना चाहिए | मसलन, हम नेगेटिव बातों, उत्साह तोड़ने वाले लोगों, छोटी-छोटी फिज़ूल की बातों जिन पर हम अक्सर गुस्सा हो जाया करतें हैं, अपनों की गलतियों/नादानियों आदि को इग्नोर (उपेक्षा) कर देना चाहिए |
      हर छोटी बात या मज़ाक  को गंभीरता से लेना ठीक नही | दूसरों से ज्यादा ख़ुद से कहना सीखें की ‘कोई बात नहि, छोड़ो’ | आपको भी अपना लक्ष्य खोजते समय ध्यान भटकाने वाली चीजों/बातों को इग्नोर करना सीखना चाहिए |
      हाँ, इस बीच हमें जरुरी और गैर-जरुरी बातों में भेद करना भी आवश्यक होगा अन्यथा हो सकता है किसी महत्वपूर्ण बात को इग्नोर करना आपको भारी पड़ जाये |

      तो, इस लॉजिक को प्रयोग करने के निर्देश हैं- स्वविवेक से काम लें और खुश रहें |  

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