हिन्दुस्तानी हैं हम, हिन्दुस्तानी हैं..........................
हिन्दुस्तानी
हैं हम, हिन्दुस्तानी हैं..........................| ये एक पुराने विज्ञापन का
थीम सोंग है शायद आप मे से कुछ को याद हो | जिसमें एस भारतीय जोड़ा तोहफे के रैपर
(चमकीली पन्नी) को भी संभाल कर रखता है | मुझे तो बस इतना ही याद है और शायद यही
पर्याप्त भी है |
यंहा मै यह कहना चाह रही हूँ की चीजो को
पूरी तरह से उपयोग करना या कहें की बर्बाद न करना हम भारतियों की पहचान है |
हालाँकि आज हमने इसे छोटे नजरिये से देखना शुरू कर दिया है |
आजकल हमारी प्रकृति कुछ एसी हो गई है की हम
कोई वस्तु बिगड़ने पर उसे सुधरवाने की जगह नई लेना पसंद करते हैं | चाहे फिर वो एक
साधारण सा पेन हो (जिसमे रिफिल डाली जा सकती है) या कोई इलेक्ट्रॉनिक
गैजेट(मोबाइल,लैपटॉप,पंखा आदि), हम उसे सस्ते में बेचकर या कचरे में फेककर तुरंत
नया ले आते हैं |
लेकिन इसमें गलती सिर्फ हमारी नही है | इसके
लिए हमारी व्यस्त दिनचर्या के साथ-साथ कुछ और बातें भी जिम्मेदार हैं | पहली बात,
वस्तुएं ही एसी आ रही हैं जिन्हें सिर्फ एक बार उपयोग कर फेकने की सिवा कोई विकल्प
नही होता (पेन,टिशु पेपर,डिस्पोजल आदि) | दूसरी बात, चीजे ठीक करवाने में लगने
वाला पैसा; एक उदाहरण लेतें हैं, एक स्मार्टफोन जो दस हजार रुपये का है मान लो
उसका डिस्प्ले उड़ गया या स्क्रीन फूट गई तो उसे ठीक करने में कम-से-कम तीन से पांच
हजार का खर्चा आयेगा साथ ही बार-बार सर्विसे सेंटर पर भटकना | और ठीक होने में
लगने वाला वक्त अलग, इस दौरान आप बिना स्मार्टफोन के रह नही पाओगे तो नया खरीद
लेना एक आसान रास्ता दिखेगा |
वैसे एसा आजकल अधिकतर वस्तुओं में हो रहा है
जैसे फूट-वेयर्स, कपडे, लगभग सारे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, वाहन आदि |
इससे नुकसान यह है की एक तो हमें रुपयों का
घाटा हो रहा है | दूसरा, हम तरह-तरह की कूडों का ढेर लगाते जा रहे हैं जिसमे
फ़िलहाल सबसे चर्चित है ई-वेस्ट | तीसरा, हम नई
पीढ़ी में भी यही आदत के संस्कार डाल रहे हैं |
तो मेरी गुजारिश है आप सभी से की “हिन्दुस्तानी
हैं हम, हिन्दुस्तानी हैं.....” और यही बने रहिये | कोशिश कीजिये चीजों के साथ
पूरा न्याय करने की अर्थात् उन्हें पूरी तरह इस्तेमाल करने की | साथ ही अपनी
संस्कृति पर गर्व कीजिये न की उस पर शर्मिंदा होइए क्यूंकि चौबे जी चले छब्बे जी
बनने और दूबे जी बनकर रह गए |

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