थोड़ी अज्ञानता भी अच्छी है
मैंने एक फिल्म देखी NH-10 | मुझे काफी पसंद
आई क्योंकि मेरे लिए वो शोकिंग किस्म की थी क्योंकि उसमे मैं जब भी अंदाजा लगाती
की अब एसा होगा तो वह हमेशा गलत निकलता | खैर अब मुद्दे पर
आतें है मैं यंहा आपको इस फिल्म की समीक्षा देने तो बैठी नही हूँ इसकी चर्चा तो
मेने इसलिए की क्योंकि यंही से मेरे मन में एक विचार उठा था |
संवाद चाहे जो भी हो या जिस भी अर्थ में हो मुझे इस द्रश्य से एक विचार आया की हम में से अधिकतर लोगो को इन( फिल्म के पुलिस अफसर के ) प्रश्नों के उत्तर मालूम होंगे और अगर मैं सही हूँ तो अधिकांश मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवारों को इन प्रश्नों के जवाब रटें हुए होंगे साथ ही शायद (फिल्म में देखकर लगा) उच्च वर्गीय परिवारों में से कम को ही इनके जवाब पता हों ? विचार यह है की अगर हम धीरे-धीरे इन सब जवाबों से अज्ञानी बन जाएँ तो ? मेरा कहने का तात्पर्य यह है की हम हमारी आने वाली पीढ़ी को इन सब प्रश्न-उत्तरों से दूर ही रखें तो कैसा होगा ? एक समय बाद शायद सब भूल जायेंगे की मिश्रा ब्राह्मण होते हैं और चौहान क्षत्रिय |
इस फिल्म में जब पुलिस अफसर जीब
चलाते हुए अभिनेत्री से बातें करता है तो बातों ही बातों में उससे पुछता है की
आपकी जाति क्या है ? आपकी गोत्र क्या है ? अभिनेत्री का
जवाब होता है मुझे नही पता |
संवाद चाहे जो भी हो या जिस भी अर्थ में हो मुझे इस द्रश्य से एक विचार आया की हम में से अधिकतर लोगो को इन( फिल्म के पुलिस अफसर के ) प्रश्नों के उत्तर मालूम होंगे और अगर मैं सही हूँ तो अधिकांश मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवारों को इन प्रश्नों के जवाब रटें हुए होंगे साथ ही शायद (फिल्म में देखकर लगा) उच्च वर्गीय परिवारों में से कम को ही इनके जवाब पता हों ? विचार यह है की अगर हम धीरे-धीरे इन सब जवाबों से अज्ञानी बन जाएँ तो ? मेरा कहने का तात्पर्य यह है की हम हमारी आने वाली पीढ़ी को इन सब प्रश्न-उत्तरों से दूर ही रखें तो कैसा होगा ? एक समय बाद शायद सब भूल जायेंगे की मिश्रा ब्राह्मण होते हैं और चौहान क्षत्रिय |
क्यों बने हम इतने ज्ञानी की उपनाम
(सरनेम) सुनकर ही पहचान जाएँ की यह फलां जाति का है | हम अपनी जाति ही
भूल जायेंगे तो भेदभाव कैसे करेंगे और फिर सभी साथ मिल-जुल कर रहेंगें |
मेरे विचार से अगर एसा हो जाये तो
और किसी कानून की आवश्यकता नही रहेगी बशर्ते सभी ईमानदारी से अपने मन से भेदभाव
भुला दें |
यह मेरी अपनी सोच है इस विचार से
मैं किसी को आहत नही करना चाह रही हूँ इसलिए कृपया इसे कोई अन्यथा न ले |

Right...
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ReplyDeletewhat a thought . you are absolutely right.it is nec
ReplyDeletewhat a thought . you are absolutely right.it is nec
ReplyDeletenice thought, it may be solution of castism
ReplyDeletenice thought, it may be solution of castism
ReplyDeletei agree,your throught,
ReplyDeleteThank you all
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