पूर्वानुमान के जोखिम

   पूर्वानुमान कितना सरल से शब्द है ना लेकिन कितनी कठिनाइयाँ पैदा कर देता है। यकीनन आप भी अपनी ज़िंदगी मे बहुत से पूर्वानुमान लगते होगें कई बार ये किसी घटना के बारे में होते हैं और कई बार किसी व्यक्ति के बारे में। हम यहाँ व्यक्तियों के बारे में लगाये जाने वाले पूर्वानुमान या अंदाजे की बात करेंगे।

किसी व्यक्ति को देखते ही हम उसके बारे में पूर्वानुमान लगाना शुरू कर देते हैं कि व्यक्ति कैसा होगा,क्या करता होगा आदि। हमारा ये पूर्वानुमान हमारे अनुभवों और जानकारियों पर आधारित होता है। एक तरह से ये हमे अपने आस पास के लोगो को समझने उन्हें त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करता है । कई लोग तो इसमें विशेषज्ञ होते हैं और अपने पूर्वानुमान की सटीकता की गारंटी भी ले लेते हैं।

लेकिन पूर्वानुमान हमेशा खरे नहीं उतरते कई बार हमें विपरीत परिणाम भी मिलते हैं। यद्यपि सन्तुलित रूप से अगर पूर्वानुमान लगाया जाए, जो लचीला भी हो तो वह अच्छा होता है जैसे, आपने किसी लड़के को देखकर अंदाज़ा लगाया कि वह नौसिखिया है जबकि आप जब उसका काम देखते हैं तो उसकी दक्षता से प्रभावित हो जाते हैं यहां आपने पूर्वानुमान तो लगाया जो गलत भी निकला लेकिन आपने अपना रवैय्या लचीला रखा और लड़के की दक्षता को स्वीकार किया बजाए अपनी बात पर अड़े रहने के। 

गलत पूर्वानुमान और त्वरित प्रतिक्रिया कई बार स्थिति को बिगाड़ भी सकती हैं जैसे एक बार मै अपनी सहेलियों के साथ स्कूटी पर जा रही थी तभी एक लड़का बाइक से हमारी ओर देखते हुए आगे निकला फिर कुछ देर बाद उसमें बाइक की गति धीमे की ओर हमारे साथ-साथ चलने लगा और उसका ध्यान हम पर ही था। मैंने पूर्वानुमान लगाया कि यह कोई मनचला है और त्वरित प्रतिक्रिया के तौर पर उसे प्रश्नवाचक लहज़े में चिल्लाया; उसके बाद पता चला वो मेरी सहेली(जो कि गाड़ी चला रही थी) के चचेरे भाई हैं। मैंने तुरन्त उनसे माफी मांगी लेकिन इस घटना का मुझे बहुत अफसोस हुआ।

इस प्रकार आप सोच सकते हैं कि कई बार पूर्वानुमान किसी को परेशानी में भी डाल सकते हैं । व्यक्ति को देखकर उसके रंग-ढंग से उसके प्रति दोषपूर्ण धारणा बना लेना सही नहीं कहा जा सकता। आपको सामने वाले को एक मौका देना चाहिए और उसके बाद किसी निर्णय पर पहुँचना चाहिए।

सभी व्यक्ति अलग अलग होते हैं हम उन्हें एक ही तराजू से नहीं तोल सकते। हमेशा याद रखिये आप स्वयं को कितना कम समझ पाए हैं तो दूसरों को इतनी आसानी से सिर्फ बाहर से देखकर कैसे समझ पाएंगे। बनी बनाई धारणा से तोलने के बजाए नई सम्भावनाओ को तलाशो, स्वीकार करो। 

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