जो दिखता है वो बिकता है.....सही है ?


शीर्षक के शब्दों पर नहीं भाव पर जाइए क्योंकी यहाँ ये बात इंसानों के परिप्रेक्ष्य में कही जा रही है। 
आज की दुनिया डिजिटल होती जा रही है साथ ही उपभोक्तावादी भी। जहां हम चीजों को उसके बाहरी आवरण से आंकते हैं और उसी के अनुसार उसे अपनाते हैं। हालांकि, बाद में हमारे विचार उस वस्तु के प्रति बदल भी सकती है। 
  ईमानदारी से सोचे तो हम व्यक्तियों के साथ भी क्या इसी तरह का तरीका नहीं अपनाते ? अधिकांश लोग ऐसा ही करते हैं और जो शेष हैं वो भले रूप के आधार पर किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें लेकिन कई बार रूप से प्रभावित होकर व्यवहार जरूर करते होंगे। 
 कुछ लोग अपवाद के रूप में बेशक मौज़ूद हैं जो दोनों वर्गों में नहीं आते। खैर हम यहां सामान्य लोगों की बात कर रहे हैं। तो फिर से मुद्दे पर आते हैं, क्या ये बाहरी दिखावा हमे कई बार सच्चाई से दूर नहीं ले जाता ? क्या इसके कारण कुछ लोगों की प्रतिभा या गुण छिपे नहीं रह जाते ? क्या कुछ लोगों के साथ रूप के आधार पर जाने-अनजाने किए गए व्यवहार से अन्याय नहीं होता ? 
 आजकल के दौर में विभिन्न तकनीकों ओर उत्पादों ने भी इसे बढ़ावा दिया है। उदाहरण के तौर पर सेल्फी को लीजिये आप मेरे बिना कहे ही समझ गए होंगे की फिल्टर्स, उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे, ऍप्स आदि की चकाचौंध में सब कहीं खो गए हैं। इन सबने एक तरह से रूप को महत्व देने की सोच को बढ़ावा दिया है। 
 हम इन सबमें समय बर्बाद करतें हैं वो तो चलो ठीक है लेकिन अच्छे दिखने का अनावश्यक दबाव कहाँ तक सही है। बहुत सी छोटी-छोटी चीजों में हम उलझे रहते हैं खासकर लड़कियों के साथ ये ज्यादा होता है ऐसा क्यों है ये बात दीगर है। तो, अब हम यहां स्त्रीवादी बहस में नहीं उलझेंगे। 
रूप से प्रभावित होना ठीक है लेकिन कब तक आप किसी को सिर्फ रूप के आधार पर प्रभवित रख सकते हो ? असल बात तो आपके व्यवहार की होती है, क्योंकि आखिर में वही मायने रखता है। आप इसे साधारण से उदाहरण से समझिये हम में से लगभग सभी लोगों को अपनी माँ से बहुत प्यार होता है माँ कैसी दिखती हैं ये बात कोई मायने नहीं रखती और ठीक ऐसा ही माँ का अपने बच्चों के लिए होता है।
 मेरा ये मानना है कि व्यक्ति को खास ध्यान अपने व्यवहार को उत्कृष्ट बनाने पर देना चाहिए क्योंकि एक बार जब आप अच्छे व्यवहार के धनी हो जाएंगे तो आपको किसी दूसरी चीज की जरूरत नही पड़ेगी। हर व्यक्ति आपके व्यवहार से निश्चित तौर पर प्रभावित होगा ही बल्कि ताउम्र रहेगा। 
  मै आज की दुनिया के ही सामान्य ज़िन्दगी के दो उदाहरण देना चाहूँगी पहला "आई" जिनका स्वभाव इतना सौम्य था कि आज तक मैंने इतना विनम्र इंसान नहीं देखा। उनके बारे में गलत कह सके ऐसा एक भी व्यक्ति शायद नहीं होगा। स्पष्टता के लिए बता दूँ की उनके चेहरे पर काफी बाल थे कुछ दाड़ी-मूंछ जैसे लेकिन उनके साथ-साथ लोगों का ध्यान भी हमेशा उनके व्यवहार पर रहता था। 
 दूसरा उदाहरण मेरे शिक्षक का है जो हर थोड़े दिनों में अपना सर मुंडवा लेते थे ताकि बालों के चलते उनका समय व्यर्थ ना हो । वो वक्त के बड़े पाबंद थे साथ ही अपने पूरे दिन को उपयोग में लाने पर उनका जोर रहता था। यहां "था" जैसे सारे शब्दों को आप "है" से स्थानांतरित कर सकते हैं। ध्यान दीजियेगा मेरे गुरु की उम्र अधिक नहीं है और वे काफी अच्छे दिखाई देते हैं लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता उनके रूप से। साथ ही अन्य व्यक्ति भी उनके गुणों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते।
 उपरोक्त दोनों मेरे आदर्शों में शामिल व्यक्तित्व हैं। जिन्होंने हमेशा मूल्यों और गुणों को तव्वजो दी। 
 तो आखिर में बस यही सलाह के साथ बात खत्म करूँगी की आप भले रूप पर भी ध्यान दीजिये लेकिन व्यवहार पर उससे ज्यादा। रूप का अनावश्यक दबाव लेने की बजाए आंतरिक रूप को निखारने पर काम कीजिये। 

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