अनसुलझी पहेली और आदर्शवादी जवाब..




शीर्षक की तरह ही है आज का मुद्दा कुछ अनसुलझा सा। क्या आप लोगो के दिमाग मे कभी ये ख़याल आया है कि हमारे आस पास के कुछ लोग ऐसे क्यूँ हैं ? ऐसे मतलब जो इंसानियत से पहले किसी और चीज़ को तवज्जो देते हैं जैसे धन, ओहदा आदि।
   इन लोगो की समझदारी पर आश्चर्य होता है कि कैसे - कैसे तरीकों को अपनाते हैं ये लोग अपने फायदे के लिए। लेकिन मुझे समझ नही आता कि ये आखिरकार इनके लिए फायदेमंद होता भी है या नहीं।
  ये लोग तात्कालिक फायदे को ही हमेशा नज़र में कैसे रख सकते हैं। क्या गलत तरीके से कमाया गया पैसा या फायदा उनकी आने वाली पीढ़ी को आरामपसंद औऱ कामचोर बनाने की राह पर नहीं ले जाता। वो क्या उसूल पेश करते होंगे अपने बच्चों के आगे, क्या ये ही बच्चे भविष्य में पैसे के आगे अपने बूढ़े माता पिता को तवज्जो देंगें।
  मेरा ख़याल है अपने जीवन मे हमे कम से कम कुछ अच्छे कर्म तो करने ही चाहिए जिनकी मिसालें आने वाली पीढ़ियों को दी जा सके। अपने बच्चों के लिए कुछ अच्छे और सच्चे किस्से सहेजिये।
  साथ ही कुछ लोग इन तथाकथित समझदारों से बिल्कुल उलट होते हैं जिन्हें नफा- नुकसान ज्यादा समझ नही आता। तो, ये सिर्फ अपने फायदे के लिए भले काम न करते हो लेकिन नासमझी में ही किसी के नुकसान की चिंता भी नही करते। जैसे कोई गरीब हाथ ठेले वाला दूषित सामग्री बेचकर मजबूरन ही सही लेकिन ग्राहकों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। यहाँ उसका लक्ष्य लाभ नहीं आजीविका है फिर भी दूसरों की चिंता से परहेज़ है। हालाँकि ये तुलनात्मक रूप में तथाकथित समझदारों से बेहतर हैं किंतु गरीबी के दुष्चक्र में भागीदार भी क्योंकि उपरोक्त उदाहरण में इनके ग्राहक भी गरीब ही होते हैं और बीमारी उन्हें और गरीब बनाये रखती है।
तो सवाल उठता है कि इस दिशा में हम क्या कर सकते हैं ? तथाकथित समझदारों और नासमझों को सही रास्ते या कहें कि मानवता के रास्ते पर कैसे लाया जा सकता है ?
  मैंने बहुत विचार किया, बहुत सारे उपाय सूझे भी  जैसे समझा कर, उदाहरण पेश कर, विचारधारा से प्रेरित कर, काउंसलिंग सेशन के क्रमिक चरणों द्वारा, लेकिन कोई भी पूरी तरह कारगर उपाय नही मिला।
यदि आपमें से किसी को मिले तो कृपया मुझे भी उससे अवगत कराएं।
  तो आज की इस एकतरफा चर्चा का अंत इस तरह से कर सकते हैं कि...देखिये भरोसा रखिये बिना सन्तुष्टि की मैं आपके विचारों को बीच मे नही छोडूँगी।
  हमे उपरोक्त दोनों तरह के लोगों को साथ मे लेकर चलना है एक परिवार की तरह और अच्छाई फैलाने की कोशिश जारी रखनी है । जैसे एक परिवार में हम धन, रूप, रंग आदि का भेदभाव किये बिना सब मिलकर रहते हैं कोई ये नहीं सोचता कि में कम खाता हूँ और ज्यादा काम करता हूँ जबकि दूसरा इसका उलट है । उसी प्रकार इस समाज या दुनिया में हमे अपनी जिम्मेदारी मुक्कमल तरीके से निभानी चाहिए । यदि हम सबकुछ जानते समझते हुए भी ऐसा नहीं करते हैं और वो भी इसलिए क्योंकि दूसरे ऐसा नहीं कर रहे हैं तो फिर तो हम में और उनमें क्या अंतर।
   हमे पैसा कमाने के लिए नही जीना, जीने के लिए पैसा कमाना है । लेकिन ये किसी अन्य ज़िन्दगी की कीमत पर न हो।

Comments

  1. Lovely think dear sister.....
    But as a natural optimist, I do see that we are starting to get some change.

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