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Showing posts from May, 2016

टैक्स चोरी इतनी आसान है क्या ???

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     हमारे देश के लगभग सवा करोड़ (1 %) लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 16 % है जबकि हाल ही में प्रकाशित सरकारी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 18,000 लोगो ने ही अपनी संपत्ति 1 करोड़ से अधिक होना स्वीकारा है | मतलब देश में सिर्फ कुछ ही लोग करोडपति हैं ? इसका जवाब तो हम सभी अच्छे से समझतें हैं |       खैर , मैं यहाँ आपको आंकड़ो के फेर में उलझाना नही चाह रही बस आप इस अंतर को अच्छे से समझें इसलिए मैंने इनका सहारा लिया | जरा सोचिये शायद हमारे देश के अमीर अरबपति तो हैं लेकिन करोडपति नही, इसलिए वे आयकर नही भरते ???       एक साधारण नौकरी पेशा व्यक्ति(सरकारी व गैर-सरकारी) यदि उसके अन्य आय को न देखें तो, अपनी तनख्वाह का आयकर TDS (आम भाषा में कार्यालय द्वारा ही कर्मचारी का टैक्स भरना ) आदि के माध्यम से भर ही देता है| अब बात करें व्यापारी वर्ग की तो मुझे उनके विषय में ज्यादा जानकारी नही है |       मेरे एक परिचित से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया की एक बड़े व्यापारी को बैंक का लेन-देन तो करना ही पड़ता है मतलब...

अजीब विचार.....

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            आज के ज़माने में आप जो सोच सकते हैं वो कर भी सकतें हैं | मैंने जब पहली बार भूगोल में बारिश की संकल्पना (कांसेप्ट) पढी थी की पहाड़ो से टकराकर भी बारिश होती है तब मैंने सोचा था की हमें भी राजस्थान में पहाड़ बना देना चाहिए |             राजस्थान में बारिश की कमी है जबकि वहाँ अरावली पर्वत की लम्बी श्रंखला है | ऐसा इसलिए है क्यूंकि ये पर्वत श्रंखला दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के सामानांतर आती है अर्थात मानसून उनसे टकराता नही बल्कि उसके साथ-साथ होकर गुजर जाता है | खैर मैं यहाँ आपसे सच में पहाड़ बनाने की बात नही कह रही हूँ क्यूंकि वो खर्चीला तो हे ही साथ में हमें यह भी देखना होगा की अगर मानसून की बारिश यहाँ हो गई तो आगे के हिस्सों में समस्या न आ जाये |              उस समय मैंने सोचा था की यह विचार अच्छा तो है किन्तु व्यावहारिक नही है | अभी-अभी मेने अख़बार मैं पढ़ा की सउदी अरब बारिश की संभावना बढाने हेतु पहाड़ बनाने की योजना पर काम ...

बूँद-बूँद से दुनिया के महासागर न सही एक घड़ा तो भरिये !!!

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आप लोगो को कुछ नही करना तो मत कीजिये लेकिन जो कुछ कर रहें हैं कम-से-कम उन्हें तो मत टोकिये |             मैं सुन-सुनकर थक चुकी हूँ की “ इससे कुछ फर्क नही पढ़ने वाला है ” | देखो कुछ समझ नही आया न | दरअसल बात ये है की छोटी-छोटी आदतें जैसे फ़िज़ूल बिजली खर्च न करना, छोटे-मोटे कामो में पानी बचाना, पैदल जाना या सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करना, पेपर कम बर्बाद करना, आदि को अपनाने वाले लोगो को अधिकांशतः कंजूस कहा जाता है या उनका मखौल उडाया जाता है | कहतें हैं की तुम्हारे अकेले के यह सब करने से कुछ फर्क नही पढने वाला अकेला चना भाड नही फोड़ सकता |             इस सन्दर्भ में आपको एक छोटी-सी कहानी सुनाना चाहूंगी | एक महिला समुद्र किनारे खड़ी थी जिसे पास खडा एक किशोर काफी देर से देख रहा था | वह महिला किनारे पर पानी के बाहर आकर मर रही मछलियों को वापस समुद्र मैं फेंककर बचाने की कोशिश कर रही थी | किशोर ने आखिर महिला से पुछ ही लिया ऐसा करने से क्या होगा? इतनी सारी मछलियों के आगे केवल कुछ को...

आखिर क्यों बचाऊँ मैं पानी ???

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देश में पानी की कमी आजकल सुर्ख़ियों का विषय बनी हुआ है | लेकिन हम में से कितने लोग इस विषय को गंभीरता से लेकर स्वयं जल संरक्षण के बारे में सोचते है |             आपके सब के बारें में सटीकता से नही कह सकती इसलिए मेरी ही बात करती हूँ अख़बारों में पानी के लिए जान जोखिम में डालते लोगों (विशेषकर महिलाओं व बच्चों ) की तस्वीरें देखकर मुझे दुःख होता है | लेकिन सिर्फ चंद ही मिनिटों में यह न जाने कहाँ गायब भी हो जाता है | जब इस बारें में मैंने सोचा तो, एक विचार आया की यदि पानी हम न सहेजें तो अर्थात घरों में इस्तेमाल के बाद निकलने वाला पानी, बारिश का पानी आदि जाकर कहीं न कहीं जमीन में या नालियों के माध्यम से निश्चित जगह ही तो जाता होगा | तो फिर समस्या क्या है पानी बर्बाद करने में ? क्यूंकि पानी जमीन में जाने से भूजल स्तर बढेगा और नालियों में जाने वाले पानी का ट्रीटमेंट कर उसे पुनः उपयोग में लाया जा सकता है |             काफी दिनों तक मेरी विचारधारा यही बनी रही लेकिन फिर जब  मै...

"लिख कर देखो अच्छा लगता है "

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             लिख कर देखो अच्छा लगता है, मेरा आजमाया हुआ है | जब भी आपका मन विचलित हो, किसी बात को लेकर दिमाग ख़राब हो रहा हो या गुस्सा आ रहा हो तो उसे लिख डालिए | ऐसा करने से आपका दिमाग शांत हो जायेगा और गुस्सा भी न जाने कहाँ काफूर हो जायेगा |             यदि आप डायरी लिखतें हैं तो उसमे और यदि नही लिखते तो किसी भी कागज़ पर लिख दीजिये | साथ ही यदि आपको लगता है की बात कुछ गंभीर व निजी है जो आप स्वयं तक ही सिमित रखना चाहते हैं तो लिखने के बाद उन कागजों को जला दीजिये | हाँ , अगर थोडा परफेक्शन से कम लें तो आप अपने विचारों को उपयोगी भी बना सकतें हैं | इसके लिए अपनी बात को थोडा सामाजिक परिवेश में रखकर लिखिए जो लगभग सभी पर लागू होती हो इस तरीके से आप तारीफ भी पाएंगे और शायद कुछ पैसे भी कमा लेंगे |             यह तरीका आपके आवेश को जरुर शांत कर देगा और जब बाद में आप अपनी लीखी बात पड़ेंगे तो शायद आपको हंसीं आये की कितनी छोटी बात थी | साथ ही इसे पढ़...

दोस्तों के साथ घूमने जाएँ कैमरे के साथ नही !!!

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                             पिछले रविवार मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने गई थी, काफी मज़ा आया लेकिन बाद में हमें महसूस हुआ की वास्तव में हमने क्या घूमा ? हमने अपना 90 % से ज्यादा समय तो सिर्फ फोटो खीचने में लगा दिया |               दरअसल आज-कल सभी लोगो में ( जिसमे मैं भी शामिल हूँ ) फोटो खिचवाने का भूत सवार हो चुका है, हम हर जगह(लोकेशंस) पर फोटो खिंचाना चाहते हैं | फिर उन्हें सोशल साइट्स पर अपलोड करने तक हम दम नहीं लेते, जैसे कोई प्रतिस्पर्धा चल रही हो |             हम सुन्दर द्रश्यों को अपनी आँखों से देखने की बजाये कैमरे की आँखों से देखने लगें हैं और उस वक्त भी हमारा ध्यान (फोकस) फोटो खिंचा रहे व्यक्ति पर होता है न की नज़ारों पर | फिर उन खिचीं गई तस्वीरों से ही हम वंहा के द्रश्यों को याद रख पातें हैं |        ...