आप कब खुश होते हैं ?


आपसे कोई पूछे कि आप क्या देखकर या क्या पाकर खुश होगें या की क्या चीज आपको खुश कर सकती है ? आपका जवाब क्या होगा नौकरी, शादी, पैसा, घर आदि-आदि शायद अधिकांश का जवाब कुछ इसी तरह का होगा। अब वो मिलने के बाद भी आप खुश होतें हैं या नही,आज मुद्दा वो नहीं है।
  दरअसल आज मुद्दा है कि आप इतना इंतज़ार क्यों करेंगे खुश होने का, मतलब ज़ाहिर है कि ये सारी चीजें प्राप्त करने में समय लगता है तो तब तक क्या ? मेरा तात्पर्य यह है कि आप अपने आस पास की बहुत सी छोटी-छोटी चीजों से भी खुश हो सकते हैं और फिर खुशी-खुशी कीजियेगा कोशिश अपनी अपेक्षाकृत बड़ी खुशियां पाने का।
अपनी पसंद की चीजों की सूची बनाइए और कोशिश कीजिये इस सूची में शामिल चीजें जितनी हो सके उतनी छोटी व आसान हो। अपनी पसंद की चीजें शामिल करने का मकसद है कि उनसे आपके चेहरे पर मुस्कान आती है या आपको खुशी मिलती है।
वैसे ही जैसे मान लो आपको गुलाब पसन्द हों और कोई आपके लिए गुलाब का बुके ले आये आपकी प्रतिक्रिया कैसी होगी ? दिल खुश और नतीज़तन एक प्यारी सी मुस्कान जो वास्तविक(नेचुरल) होगी ।
ये सूची बनाने से होगा यह कि आपको समझ आएगा कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं और बाद में आपको इस सूची की जरूरत नहीं पड़ेगी आपका दिमाग अपने आप आस-पास ऐसी चीजें ढूंढ लेगा।
इस सूची के कुछ उदाहरण मैं देना चाहूँगी और वो कहीं-न- कहीं जरूरी भी है। मेरी सूची में है -
- गुलाबी आसमान
- आस-पास हरियाली, कोई सुंदर पेड़-पौधा या फूल
- ठंडी हवा का चलना
- गरमा-गरम चावल
- कोई भी बच्चा स्कूल जाता, खेलता, बात करता या    शांत खड़ा
- किसी की भी नेचुरल मुस्कान
- वक्त पर तैयार हो जाना
- अदरक वाली चाय
- एक बड़ा रसीला आम 
ऐसी ही ढेरों बातें हैं जो मेरे लिए खुश होने का ज़रिया बनती हैं। बस, उस पल मैं कुछ और नही सोचती ऐसा लगता है बस यही स्वर्ग है जैसे आम की एक चीर खाओ आँख बंद करके महसूस करो उसके रस को, कितना अच्छा लगता है मतलब ऐसा अनुभव जिसे ज़ाहिर करना मुश्किल है उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। कोई फूल देखकर उसकी सुंदरता को महसूस कीजिए क्या उस वक्त आप दुनिया की तमाम उलझनों से दूर नही हो जाते कितना सुहाना लगता है या कितना सुकून मिलता है।
ज़िन्दगी में ऐसी चीजें थोड़े ठहराव से ही महसूस की जा सकती है अगर आप ज़िन्दगी की कभी न खत्म होने वाली दौड़ में ही लगे रहेगें तो ऐसे पलों को कभी जी ही नहीं पाएँगे।
ऐसी अनिश्चितता भरी जिंदगी में आपको हर दिन कुछ-न-कुछ खुश रहने के बहाने ढूंढ ही लेने चाहिए वरना ज़िन्दगी कट जायगी और आप इंतज़ार में ही रह जाएंगे।
और ऐसी खुशियाँ ही आपको ताकत देगी दुनिया की मुश्किलों से लड़ने में वरना बड़ी आसानी से आप कह सकते हैं और यकीनन सिद्ध भी कर सकते हैं कि आपकी ज़िंदगी में ढेरों परेशानियां हैं और खुशी का नामोनिशान नहीं है। ऐसी छोटी खुशियां आपको यकीन दिलाती रहेंगी की ज़िंदगी बड़ी हसीन है अगर नज़रिया उस तरह का हो।
साथ ही ऐसे खुशी के पल आपके पूरे दिन को अच्छा बनाने का काम भी कर सकते हैं। ऐसे खुशी के पल ढूंढिए कम-से-कम हर दिन एक और फिर आपको ये कभी नहीं कहना पड़ेगा कि आज का दिन बुरा था क्योंकि वो पल आपको याद दिलाएगा की छोटी ही सही कुछ अच्छी बात भी हुई आज।
  ऐसे जीओ की कल सुबह ना उठो तो भी गम ना हो। ज़िन्दगी में मलाल ना हो कि कुछ नही कर पाए। भविष्य की फिक्र अच्छी बात है लेकिन उस फिक्र में वर्तमान को भुला देना किस हद तक सही है। लेकिन इस वर्तमान को जीने में हमारी निगाहें लक्ष्य पर भी होनी चाहिए वरना आप वर्तमान की अल्पकालिक खुशी में कहीं खो सकते हैं। निष्कर्षतः, त्याग और भोग दोनों के बीच संतुलन बनाए रखिए। बेशक त्याग बड़ा और भोग छोटा होना चाहिए लेकिन कीमत(वैल्यू) दोनों की होनी चाहिए।

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